April 15, 2024

चोल राजवंश: इतिहास, युद्ध और शासक 

Chola Dynasty: History, Wars and Rulers in Hindi and English in summary

प्राचीन भारत का एक राजवंश। चोल (तमिल) प्राचीन भारत का एक राजवंश था।
दक्षिण भारत में और पास के अन्य देशों में तमिल चोल शासकों ने 9 वीं शताब्दी से 13 वीं
शताब्दी के बीच एक अत्यंत शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य का निर्माण किया।
अपने चरम उत्कर्ष के समय चोल साम्राज्य तथा उसका प्रभावक्षेत्र (1050 ई.)
चोलों की राजधानी उरैयूर थी

बाघ उनके राज्य का प्रतीक था। पेरिया पुरनम में चोल के बाघ ध्वज
का उल्लेख किया गया है।

चोल साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली शासक राजराजा प्रथम है ।
उन्हें चोल शक्ति को बहाल करने और दक्षिण भारत और हिंद महासागर
में अपना वर्चस्व सुनिश्चित करने के लिए याद किया जाता है।

चोल वंश का अंतिम राजा राजेंद्र तृतीय (1246-1279) हुआ।
1279 में, राजा मारवर्मन कुलशेखर पांडियन प्रथम ने चोलों के
अंतिम राजा राजेंद्र चोल III को हराया और वर्तमान तमिलनाडु
में पांड्य शासन की स्थापना की।

A dynasty of ancient India. The Cholas (Tamil – ) were a dynasty of ancient India.
Tamil Chola rulers in South India and other nearby countries ruled from the 9th century to the 13th century.
Built a very powerful Hindu empire in the middle of the century.
The Chola Empire and its sphere of influence at the time of its peak (1050 AD)
Uraiyur was the capital of the Cholas.

The tiger was the symbol of his kingdom. Tiger flag of Chola at Periya Purnam
has been mentioned.

Rajaraja I was the most powerful ruler of the Chola Empire.
to restore the Chola power and to restore South India and the Indian Ocean.
He is remembered for ensuring his supremacy.

The last king of the Chola dynasty was Rajendra III (1246-1279).
In 1279, King Maravarman Kulasekhara Pandian I ruled the Cholas.
Defeated the last king Rajendra Chola III and present Tamil Nadu
Pandya rule was established in

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