November 30, 2023

NORTH EAST के तीन राज्यों के नतीजे…LJP, NCP, JDU, TMC जैसी पार्टियों को क्या मिला ?

त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा कई क्षेत्रीय पार्टियों ने किस्मत आजमाई है. एनसीपी से लेकर जेडीयू, टीएमसी और चिराग पासवान की पार्टी लोजपा भी पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरी है. जानिए आखिर इस चुनाव से उनके हाथ में क्या आया ?

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में सत्ताधारी दलों की वापसी होती दिख रही है। बीजेपी एक बार फिर त्रिपुरा में वापसी कर रही है जबकि नागालैंड में एनडीपीपी-बीजेपी गठबंधन का जादू बरकरार है. मेघालय में एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती नजर आ रही है, लेकिन त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन रही है. ऐसे में सबकी निगाहें उत्तर भारत के जदयू, लोजपा, टीएमसी और एनसीपी जैसे क्षेत्रीय दलों पर हैं, जो पूर्वोत्तर के चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. कैसा रहा इन पार्टियों का प्रदर्शन ?

JDU-LJP-NCP को नगालैंड में क्या मिला

नागालैंड विधानसभा चुनाव में कुल 13 पार्टियां मैदान में उतरी हैं। राज्य की 60 विधानसभा सीटों में सत्तारूढ़ एनडीपीपी ने 40 और बीजेपी ने 36 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. खबर लिखे जाने तक के रुझानों में एनडीपीपी 25 सीटों पर जबकि बीजेपी 13 सीटों पर आगे चल रही है. ऐसे में एनडीपीपी और बीजेपी गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है.

नागालैंड विधानसभा चुनाव में बिहार के कई राजनीतिक दल भी मैदान में उतरे हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने नागालैंड विधानसभा चुनाव में 9 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से उसके उम्मीदवार 2 सीटों पर आगे चल रहे हैं. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी किस्मत आजमा रही है। लोजपा (पासवान) ने 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें एनडीपीपी ने जिन पांच विधायकों के टिकट काटे थे, उन्हें भी लोजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था। लोजपा का यह दांव काफी कामयाब होता नजर आ रहा है, पार्टी के दो प्रत्याशी जीतते नजर आ रहे हैं.

नागालैंड में, शरद पवार की एनसीपी पांच सीटों पर आगे चल रही है, जबकि रामदास अठावले की आरपीआई (अठावले) के दो उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। लालू प्रसाद यादव की राजद ने नगालैंड में भी अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को एक भी सीट मिलती नजर नहीं आ रही है. वहीं, नगालैंड के बाहर से चार प्रमुख दल विधायक बनते दिख रहे हैं। जदयू और लोजपा पहले भी विधायक रह चुके हैं। पिछले चुनाव में जदयू ने 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से एक विधायक चुन लिया गया था।

मेघालय में TMC किंगमेकर

मेघालय विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। सत्तारूढ़ एनपीपी राज्य की 60 सीटों में से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन अपने दम पर सत्ता का आंकड़ा नहीं छू पा रही है। एनपीपी से अलग होकर बीजेपी को अकेले चुनाव लड़ने का फायदा मिला है। बीजेपी 2 सीटों से बढ़कर 3 सीटों पर जा रही है. ममता बनर्जी की टीएमसी ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया है। टीएमसी पांच सीटों पर आगे चल रही है, जो जीत के बेहद करीब है. ऐसे में टीएमसी किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रही है.

एनपीपी प्रमुख कोनराड संगमा की एनपीपी को 23 सीटें मिल रही हैं जबकि बीजेपी को 3, यूडीएफ को 10, वीपीपी को 5, कांग्रेस को 4 और एचएसपीडीपी को 2 सीटें मिल रही हैं. टीएमसी को भले ही पांच सीटें मिल रही हों, लेकिन सवाल यह है कि क्या कोनराड संगमा उन्हें लेकर सरकार बनाएंगे. नतीजे से पहले संगमा से बीजेपी नेता और असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने उनसे मुलाकात की है.

त्रिपुरा में TMC को क्या मिला

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन की सत्ता में वापसी हो रही है, लेकिन इस चुनाव का मुख्य चेहरा टिपरा माथो के मुखिया प्रद्योत बर्मन हैं. पहली बार चुनाव मैदान में उतरे टिकरा माथो के हिस्से में 11 सीटें आती नजर आ रही हैं. वहीं, लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन तो कोई करिश्मा नहीं दिखा पाया, लेकिन लेफ्ट को सीपीएम को 11 और कांग्रेस को 4 सीटें मिलती दिख रही हैं। त्रिपुरा में पूरी ताकत से चुनाव लड़ने वाली टीएमसी खाली हाथ रही. टीएमसी को एक भी सीट मिलती नजर नहीं आ रही है और वोट शेयर भी एक फीसदी से भी कम है. ऐसे में त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव लड़ने से टीएमसी को क्या राजनीतिक फायदा मिला?

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